भक्ति शास्त्री सेल्फ-स्टडी कोर्स (हिन्दी)
Course Description
भक्ति शास्त्री सेल्फ-स्टडी कोर्स (हिन्दी)
अपनी सुविप्रभुपादश्रील प्रभुपाद के ग्रंथों का अध्ययन करें और इस्कॉन शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत इस्कॉन परीक्षा बोर्ड से भक्ति शास्त्री प्रमाणपत्र प्राप्त करें।
✅ वर्ष में किसी भी समय प्रवेश की सुविधा
✅ अपनी सुविधानुसार अध्ययन करने का अवसर
✅ वेबसाइट पर रिकॉर्डेड वीडियो कक्षाएँ
✅ ऑनलाइन परीक्षा देने की सुविधा
✅ परीक्षा के लिए निर्धारित मार्गदर्शक एवं परीक्षक का सहयोग
✅ इस्कॉन शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत प्रमाणपत्र
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पाठ्यक्रम का परिचय
हरे कृष्ण! परतत्त्व चतुष्पाठी की ओर से भक्ति शास्त्री ऑनलाइन सेल्फ-स्टडी कोर्स में आपका हार्दिक स्वागत है।
यह पाठ्यक्रम इस्कॉन शिक्षा मंत्रालय (ISKCON Ministry of Education) के पर्यवेक्षण में कार्यरत इस्कॉन परीक्षा बोर्ड (ISKCON Board of Examinations) के अंतर्गत संचालित एक प्रामाणिक शास्त्रीय शिक्षा कार्यक्रम है।
इस पाठ्यक्रम का संचालन अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापकाचार्य कृष्णकृपामूर्ति ए. सी. भक्तिवेदान्त स्वामी श्रील प्रभुपाद के निर्देशों एवं अभिलाषाओं के अनुरूप किया जा रहा है।
श्रील प्रभुपाद की इच्छा थी कि उनके सभी अनुयायी नियमित रूप से शास्त्रों का अध्ययन करें, कृष्णभावनामृत के दार्शनिक सिद्धांतों को भलीभाँति समझें, उन्हें अपने जीवन में उतारें तथा इस दिव्य ज्ञान का प्रचार करने में सक्षम बनें।
भक्ति शास्त्री सेल्फ-स्टडी कोर्स विशेष रूप से उन भक्तों के लिए तैयार किया गया है, जो पारिवारिक, व्यावसायिक अथवा सेवासंबंधी व्यस्तताओं के कारण नियमित लाइव कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो पाते।
हमारी वेबसाइट पर उपलब्ध ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली (LMS) के माध्यम से विद्यार्थी रिकॉर्डेड कक्षाएँ देख सकते हैं, अध्ययन सामग्री डाउनलोड कर सकते हैं तथा अपनी सुविधानुसार अध्ययन करके ऑनलाइन परीक्षाओं में सम्मिलित हो सकते हैं।
इस कोर्स में वर्ष के किसी भी समय प्रवेश लिया जा सकता है और विश्व के किसी भी स्थान से अध्ययन किया जा सकता है।
पाठ्यक्रम में सम्मिलित ग्रंथ
भक्ति शास्त्री पाठ्यक्रम में श्रील प्रभुपाद के निम्नलिखित चार प्रमुख ग्रंथों का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है।
1. श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप – संपूर्ण ग्रंथ
2. भक्तिरसामृतसिन्धु – भूमिका से अध्याय 19 तक
3. श्रीईशोपनिषद् – संपूर्ण ग्रंथ
4. श्रीउपदेशामृत – संपूर्ण ग्रंथ
संपूर्ण पाठ्यक्रम को 6 इकाइयों (Modules) में विभाजित किया गया है।
प्रत्येक इकाई में रिकॉर्डेड वीडियो कक्षाएँ, अध्ययन सामग्री तथा निर्धारित मूल्यांकन सम्मिलित हैं।
प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को सभी छह इकाइयों की निर्धारित परीक्षाएँ सफलतापूर्वक पूर्ण करनी होंगी।
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कोर्स में प्रवेश कैसे लें और अध्ययन कैसे करें?
चरण 1: वेबसाइट पर अपना अकाउंट बनाएँ
सबसे पहले हमारी वेबसाइट पर जाएँ।
वेबसाइट: www.paratattva.in
वेबसाइट के ऊपर दाईं ओर दिए गए Login बटन पर क्लिक करें।
इसके बाद अपना नाम, ईमेल आईडी और पासवर्ड दर्ज करके एक नया अकाउंट बनाएँ।
यदि आपका अकाउंट पहले से बना हुआ है, तो अपनी ईमेल आईडी और पासवर्ड से लॉगिन करें।
चरण 2: कोर्स में प्रवेश लें
अकाउंट बनाने के बाद पुनः भक्ति शास्त्री कोर्स के इस पेज पर आएँ।
यहाँ दिए गए Enroll Now बटन पर क्लिक करें।
इसके बाद निर्धारित कोर्स शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करके प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण करें।
भुगतान सफल होने के बाद आपका प्रवेश सुनिश्चित हो जाएगा और आपको अपने अकाउंट के माध्यम से कोर्स की सभी उपलब्ध कक्षाओं एवं अध्ययन सामग्री तक पहुँच प्राप्त हो जाएगी।
चरण 3: WhatsApp ग्रुप से जुड़ें
कोर्स में सफलतापूर्वक प्रवेश लेने के बाद इस पेज पर जहाँ पहले Enroll Now बटन दिखाई दे रहा था, वहाँ Join WhatsApp Group बटन दिखाई देगा।
उस बटन पर क्लिक करके भक्ति शास्त्री विद्यार्थियों के आधिकारिक WhatsApp ग्रुप से जुड़ें।
WhatsApp ग्रुप से जुड़ना अत्यंत आवश्यक है।
इसी ग्रुप के माध्यम से आपको परीक्षा से संबंधित सूचनाएँ, परीक्षा की प्रक्रिया, निर्धारित मार्गदर्शक एवं परीक्षक की जानकारी तथा अन्य आवश्यक निर्देश प्राप्त होंगे।
ग्रुप में जुड़ने के बाद अपना संक्षिप्त परिचय देते हुए यह संदेश भेजें:
“हरे कृष्ण। मैंने अभी भक्ति शास्त्री सेल्फ-स्टडी कोर्स में प्रवेश लिया है। कृपया मुझे कोर्स और परीक्षा की प्रक्रिया के विषय में मार्गदर्शन प्रदान करें।”
चरण 4: सबसे पहले कोर्स का परिचयात्मक वीडियो देखें
विशेष अनुरोध: कोर्स का अध्ययन प्रारंभ करने से पहले इस पेज पर उपलब्ध परिचयात्मक (Preview) वीडियो अवश्य देखें।
इस वीडियो में कोर्स की संपूर्ण व्यवस्था, कक्षाओं का अध्ययन करने की प्रक्रिया, परीक्षा प्रणाली तथा मार्गदर्शक से संपर्क करने की विधि समझाई गई है।
इस वीडियो को ध्यानपूर्वक देखने से आपको कोर्स की संपूर्ण प्रक्रिया आसानी से समझ में आ जाएगी।
चरण 5: पाठ्यपुस्तिका डाउनलोड करें और कक्षाएँ प्रारंभ करें
प्रवेश लेने के बाद वेबसाइट पर पाठ्यक्रम की छह इकाइयों के अनुसार व्यवस्थित सभी रिकॉर्डेड वीडियो कक्षाएँ उपलब्ध होंगी।
सबसे पहले संबंधित PDF हैंडबुक, अध्ययन सामग्री तथा अन्य आवश्यक पुस्तिकाएँ डाउनलोड कर लें।
इसके बाद पहली इकाई से क्रमशः कक्षाएँ देखना प्रारंभ करें।
आप अपनी सुविधानुसार किसी भी समय रिकॉर्डेड कक्षाएँ देख सकते हैं।
कक्षाओं के साथ-साथ श्रील प्रभुपाद के मूल ग्रंथों का नियमित अध्ययन करना भी आवश्यक है।
इस कोर्स में किसी निश्चित समय पर कक्षा में उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। आप अपने समय और सुविधा के अनुसार अध्ययन कर सकते हैं।
चरण 6: अपने निर्धारित मार्गदर्शक या परीक्षक से संपर्क करें
प्रत्येक विद्यार्थी को परीक्षा प्रक्रिया पूर्ण करने के लिए एक निर्धारित मार्गदर्शक (Guide) या परीक्षक (Examiner) का सहयोग प्रदान किया जाएगा।
मार्गदर्शक का नाम और संपर्क नंबर आधिकारिक WhatsApp ग्रुप के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
आपके मार्गदर्शक आपको परीक्षा की प्रक्रिया, प्रश्नों के प्रकार, उत्तर जमा करने की विधि तथा अन्य आवश्यक निर्देश समझाएँगे।
यदि कोर्स या परीक्षा के संबंध में आपका कोई प्रश्न है, तो आप WhatsApp ग्रुप में पूछ सकते हैं।
चरण 7: परीक्षा के लिए तैयार होने पर सूचित करें
किसी इकाई की सभी कक्षाएँ पूरी करने तथा संबंधित ग्रंथों का अध्ययन करने के बाद आप उस इकाई की परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं।
जब आप परीक्षा के लिए तैयार हों, तो WhatsApp ग्रुप में या अपने मार्गदर्शक को सूचित करें।
उदाहरण के लिए: “हरे कृष्ण। मैंने भक्ति शास्त्री कोर्स की प्रथम इकाई का अध्ययन पूरा कर लिया है और अब परीक्षा के लिए तैयार हूँ। कृपया मुझे परीक्षा की अगली प्रक्रिया के विषय में मार्गदर्शन प्रदान करें।”
इसके बाद आपके मार्गदर्शक आपको परीक्षा देने तथा उत्तर जमा करने की प्रक्रिया समझाएँगे।
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परीक्षा एवं मूल्यांकन प्रणाली
भक्ति शास्त्री कोर्स में मुख्य रूप से तीन प्रकार के मूल्यांकन होते हैं।
1. बंद पुस्तक मूल्यांकन (Closed Book Assessment – CBA)
इस परीक्षा में विद्यार्थी को पुस्तक या नोट्स की सहायता लिए बिना निर्धारित प्रश्नों के उत्तर देने होते हैं।
इसका उद्देश्य विद्यार्थी की शास्त्रीय समझ तथा महत्त्वपूर्ण सिद्धांतों को स्मरण रखने की क्षमता का मूल्यांकन करना है।
मार्गदर्शक के निर्देशानुसार यह परीक्षा ऑनलाइन वीडियो कॉल के माध्यम से मौखिक रूप में अथवा प्रश्नों के उत्तरों का वीडियो रिकॉर्ड करके भेजने के माध्यम से संपन्न की जा सकती है।
2. खुली पुस्तक मूल्यांकन (Open Book Assessment – OBA)
इस परीक्षा में विद्यार्थी श्रील प्रभुपाद के ग्रंथों की सहायता से निर्धारित प्रश्नों के लिखित उत्तर तैयार करते हैं।
इसका उद्देश्य शास्त्रीय सिद्धांतों की समझ, चिंतन तथा उनके व्यावहारिक प्रयोग की क्षमता का मूल्यांकन करना है।
विद्यार्थी अपने उत्तर कंप्यूटर पर टाइप करके PDF के रूप में अथवा स्पष्ट रूप से हाथ से लिखकर स्कैन या फोटो के रूप में जमा कर सकते हैं।
निर्धारित उत्तर अपने मार्गदर्शक को बताए गए ऑनलाइन माध्यम से भेजने होंगे।
3. श्लोक मूल्यांकन (Sloka Assessment)
विद्यार्थियों को भक्ति शास्त्री पाठ्यक्रम में निर्धारित संस्कृत श्लोकों को कंठस्थ करना होगा।
मार्गदर्शक के निर्देशानुसार श्लोक परीक्षा ऑनलाइन वीडियो कॉल अथवा रिकॉर्डेड वीडियो के माध्यम से संपन्न की जा सकती है।
विशेष सूचना: परीक्षा की विस्तृत प्रक्रिया, प्रश्नपत्र, उत्तर जमा करने की विधि तथा WhatsApp, Telegram, ईमेल या अन्य माध्यमों का उपयोग करने संबंधी निर्देश आपके निर्धारित मार्गदर्शक द्वारा प्रदान किए जाएँगे।
कोर्स में प्रवेश की पात्रता
भक्ति शास्त्री कोर्स में प्रवेश लेने के लिए विद्यार्थियों में निम्नलिखित योग्यताएँ होना आवश्यक है।
1. हरे कृष्ण महामंत्र का जप
कम से कम पिछले एक वर्ष से प्रतिदिन जपमाला पर 16 माला हरे कृष्ण महामंत्र का नियमित जप कर रहे हों।
2. चार नियमों का पालन
कम से कम पिछले एक वर्ष से निम्नलिखित चार नियमों का निष्ठापूर्वक पालन कर रहे हों:
* मांसाहार का त्याग: मांस, मछली, अंडा, प्याज और लहसुन का सेवन न करना।
* सभी प्रकार के नशे का त्याग: शराब, तंबाकू, मादक पदार्थ, चाय, कॉफी आदि का सेवन न करना।
* जुए का त्याग: जुआ, सट्टा तथा अन्य प्रकार की द्यूत-क्रीड़ाओं से दूर रहना।
* अवैध यौन संबंधों का त्याग: विवाह के बाहर यौन संबंधों से दूर रहना।
3. शास्त्रीय अध्ययन
श्रील प्रभुपाद के ग्रंथों का नियमित अध्ययन कर रहे हों।
4. भगवद्गीता का अध्ययन
कम से कम एक बार श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप का संपूर्ण अध्ययन किया हो।
5. इस्कॉन से संबंध
कम से कम पिछले एक वर्ष से अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) तथा उसकी भक्ति एवं प्रचार गतिविधियों से जुड़े हुए हों।
कोर्स की अवधि
यह एक सेल्फ-स्टडी कोर्स है, इसलिए विद्यार्थी अपनी सुविधा और उपलब्ध समय के अनुसार अध्ययन कर सकते हैं।
हालाँकि, पाठ्यक्रम को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करना आवश्यक है।
न्यूनतम अवधि: 3 महीने
अधिकतम अवधि: 2 वर्ष
प्रवेश की तिथि से अधिकतम दो वर्षों के भीतर विद्यार्थियों को सभी छह इकाइयों का अध्ययन तथा निर्धारित परीक्षाएँ पूरी करनी होंगी।
यदि कोई विद्यार्थी दो वर्षों के भीतर कोर्स पूरा नहीं कर पाता, तो उसका पंजीकरण अमान्य हो जाएगा।
इसके बाद कोर्स जारी रखने के लिए लागू पुनः पंजीकरण नियमों के अनुसार दोबारा पंजीकरण करना होगा।
प्रमाणपत्र (Certificate)
सभी छह इकाइयों की निर्धारित परीक्षाओं में सफलतापूर्वक उत्तीर्ण होने तथा आवश्यक शैक्षणिक एवं पात्रता संबंधी शर्तों को पूरा करने के बाद विद्यार्थी को इस्कॉन शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत इस्कॉन परीक्षा बोर्ड द्वारा भक्ति शास्त्री प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा।
केवल कोर्स में प्रवेश लेने से प्रमाणपत्र प्राप्त करने की पात्रता सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए सभी निर्धारित परीक्षाओं और अन्य आवश्यकताओं को सफलतापूर्वक पूरा करना अनिवार्य है।
विद्यार्थियों के लिए विशेष निर्देश
परतत्त्व चतुष्पाठी का उद्देश्य विश्वभर के भक्तों को व्यवस्थित शास्त्रीय शिक्षा प्राप्त करने में सहायता प्रदान करना है।
हम समझते हैं कि अनेक भक्त पारिवारिक उत्तरदायित्वों, व्यावसायिक कार्यों, मंदिर की सेवाओं तथा अन्य व्यस्तताओं के कारण नियमित लाइव कक्षाओं में उपस्थित नहीं हो पाते।
इसीलिए इस सेल्फ-स्टडी प्रणाली के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी सुविधानुसार अध्ययन करने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
विद्यार्थियों की सहायता के लिए रिकॉर्डेड कक्षाएँ, अध्ययन सामग्री, ऑनलाइन परीक्षाएँ तथा निर्धारित मार्गदर्शक की व्यवस्था की गई है।
लेकिन सेल्फ-स्टडी कोर्स की सफलता मुख्य रूप से विद्यार्थी की व्यक्तिगत रुचि, अनुशासन, निष्ठा और नियमित अध्ययन पर निर्भर करती है।
प्रत्येक विद्यार्थी से अपेक्षा की जाती है कि वह स्वयं पहल करके कक्षाएँ देखे, निर्धारित ग्रंथों का अध्ययन करे, परीक्षाओं की तैयारी करे तथा दो वर्षों की निर्धारित अवधि के भीतर कोर्स पूरा करे।
मार्गदर्शक परीक्षा से संबंधित आवश्यक सहायता प्रदान करेंगे, लेकिन विद्यार्थियों को बार-बार याद दिलाकर कक्षाएँ या परीक्षाएँ पूरी करवाना मार्गदर्शक की जिम्मेदारी नहीं है।
इसलिए विद्यार्थियों से अनुरोध है कि वे नियमित अध्ययन करने तथा पाठ्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करने के दृढ़ संकल्प के साथ ही इस कोर्स में प्रवेश लें।
कोर्स शुल्क एवं रिफंड नीति
यह एक रिकॉर्डेड सेल्फ-स्टडी कोर्स है।
इसलिए एक बार प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण होने तथा कोर्स की अध्ययन सामग्री तक पहुँच प्रदान किए जाने के बाद कोर्स शुल्क वापस नहीं किया जाएगा।
विद्यार्थियों से अनुरोध है कि प्रवेश लेने से पहले कोर्स का विवरण, पात्रता, अवधि, परीक्षा प्रणाली तथा अन्य आवश्यक नियमों को ध्यानपूर्वक पढ़ लें।
संपर्क करें
कोर्स से संबंधित किसी विशेष प्रश्न या सहायता के लिए संपर्क करें।
परतत्त्व चतुष्पाठी (Paratattva Catuspathi)
वेबसाइट: www.paratattva.in
ईमेल: info@paratattva.in
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पुस्तकें ही आधार हैं – Books Are the Basis
श्रील प्रभुपाद के ग्रंथ हमारे आध्यात्मिक जीवन का आधार हैं। इन ग्रंथों के व्यवस्थित अध्ययन, चिंतन और जीवन में व्यावहारिक प्रयोग के माध्यम से हम कृष्णभावनामृत की अपनी समझ को गहरा कर सकते हैं तथा भक्ति में अपनी निष्ठा को और अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं।
परतत्त्व चतुष्पाठी की ओर से भक्ति शास्त्री सेल्फ-स्टडी कोर्स में आपका हार्दिक स्वागत है।
हरे कृष्ण! जय श्रील प्रभुपाद!
Course Curriculum
8 sections • 112 lessons
Handbook
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Handbook
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कोर्स का विवरण और परीक्षा प्रणाली
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कोर्स का विवरण और परीक्षा प्रणाली
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इकाई 3: श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 13-18 (Unit 3)
24 lessons
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12 lessons
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इकाई 5.1: श्री ईशोपविषद् (Unit 5.1)
8 lessons
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इकाई 5.2: श्री उपदेशामृत (Unit 5.2)
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इकाई 5.2: श्री उपदेशामृत (Unit 5.2)
17 lessons
इकाई 5.2: श्री उपदेशामृत (Unit 5.2)
17 lessons
